श्रेष्ठ, ज्ञाइन्द्रबहादुर

मुलुकी ऐन (एक टिप्पणी) - काठमाडौं पैरवी प्रकासन 2055 - ६३२पृ.

कानुन;मुलुकी ऐन

349.5