वनवासी, रूपक

ओ ! इरानकी मेनका (गजलसंग्रह) - काठमाडौं वैरागी जेठा २०६५ वि.सं. - 55 p. सचित्र

९७८९९३७२०६७९२

नेपाली साहित्य;गजल

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