शिवानन्द

ब्रह्मचर्य्य ही जीवन है और वीर्य्यनाश ही मृत्यु है - इलाहाबाद केदारनाथ गुप्त १९२९ - 172 p.


Philosophy

११३.८ / शि६९२ब्र १९२९